Sunday, February 21, 2010

शायद



तेरे लिये रात गुजारने को
खाली करके पलकों के कोने रखता ॥
गर मालूम होता तुम आओगे
मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥
रह जाता चाहे खुद भूखा
देता तुम्हे जरुर रुखा-सूखा
प्यास तेरी बुझ जाती शायद
जो भरके मन के दोने रखता ॥
मिल जाती गर पहले ही चिठ्ठी
बचा लेता थोड़ी सी मिटटी
तुम आते जब,बीज जिंदगी के
शायद तुम में बोने रखता ॥
शायद कुछ गम तेरे होते
और कुछ आंसूं मेरे होते
सब कुछ तसल्ली से पोंछ-पांछ कर
सुबह तक सोने को रखता ॥




28 comments:

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

गर मालूम होता तुम आओगे
मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥

behad sunder aur sanjeeda lekhni...
bahut badhaayee...

Apanatva said...

itanee pratibha.........lekhan me ....
vismit kar gayee ............
dil ko choo jane wala lekhan .........
Badhai............

एक कविता अर्थहीन ,श्याम – शवेत तथा मौन । said...

Bahut hi achhi kavita hain...........

एक कविता अर्थहीन ,श्याम – शवेत तथा मौन । said...

Bahut hi achhi kavita hain

Ashish said...

लाज़वाब... जैसे किसी ने अपना मन निकाल कर रख दिया हो सामने.... हर पंक्ति अपने मैं खूब है, कितनी भी बार पढ़ी जा सके वाली कविता... बहुत खूब पारुल... वाह....

Ashish said...

गर मालूम होता तुम आओगे
मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥

प्यास तेरी बुझ जाती शायद
जो भरके मन के दोने रखता ॥

waaahhhhhhh

Udan Tashtari said...

गर मालूम होता तुम आओगे
मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥

प्यास तेरी बुझ जाती शायद
जो भरके मन के दोने रखता ॥

-बहुत करीने से उकेरे हैं भाव दिल को छूते हुए. शानदार!!

Unknown said...

bhetreen rachna .....bandhaayee ho.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर और छुते हुये भाव. शुभकामनाएं.

रामराम.

प्रिया said...

behtareen parul....good work

Arshad Ali said...

गर मालूम होता तुम आओगे
मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥

शानदार रचना ,मन को रचना छू जाये ऐसा सब कुछ है इसमें ....बधाई

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

तेरे लिये रात गुजारने को
खाली करके पलकों के कोने रखता ॥
गर मालूम होता तुम आओगे
मैं ख्वाबों के बिछोने रखता ॥

ओ माय गौड़.... इन पंक्तियों ने तो दिल को छू लिया...

सुंदर गूंथे हुए शब्दों में.... मनमोहक रचना...


रिगार्ड्स...

Parul kanani said...

thanx!

आओ बात करें .......! said...

तुम अतिथि हो या अंतर्मन....!!
तुम पर तन-मन-धन समर्पण .

संजय भास्‍कर said...

Bahut hi achhi kavita hain

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.

संजय भास्‍कर said...

आपके लेखन ने इसे जानदार और शानदार बना दिया है....

Unknown said...

यूं ही लिखते रहिए बेहद खूबसूरत पंक्तियां, बधाई और शुभकामनाएं।

निर्मला कपिला said...

khvaabon ke bichaune ------man ke done----- vaah kyaa khoobasoorat likhaa hai eachana bahut pasand aayee dhanyavaad

Mithilesh dubey said...

पारुल जी आपकी रचना हमें प्रतियोगिता के लिए प्राप्त हो गई है ।

मिथिलेश दुबे
संचालक
हिन्दी साहित्य मंच

संपर्क सूत्र
09891584813

www.hindisahityamanch.com

नया सवेरा said...

kamaal ki rachna hai...
pasand aai

Parul kanani said...

aap sabka aabhar!

Anonymous said...

बहुत खूब रचना।

RAJNISH PARIHAR said...

लाज़वाब...शानदार!!बेहद खूबसूरत पंक्तियां,मेरी शुभकामनाएं.....

कडुवासच said...

शायद कुछ गम तेरे होते
और कुछ आंसूं मेरे होते
....बेहतरीन...प्रभावशाली...प्रसंशनीय रचना !!!

nidhi said...

प्यास तेरी बुझ जाती शायद
जो भरके मन के दोने रखता...
Well versed ...seedha dil ko choo gayi.

Parul kanani said...

so many thanx to all of you!!

Pawan Nishant said...

badi pyari yaden hain aur utni he pyari rachna. holi ki shubhkamnayen.