
थम जा, जिंदगी..थम जा!!
मुझे मेरे होने का मतलब समझा ॥
देख संग मेरे रातों को जागकर
क्या मिलेगा ख्वाबों के पीछे भागकर
टूट जायेंगें ये,छूट जायेंगें ये
सुबह की हमसफ़र अब बन जा॥
बनकर चमकाएगी आंसुओं को
कब तलक मोती
जो अँधेरा ही न मिटा सके
ऐसी भी क्या ज्योति
मन की किसी उम्मीद से छन जा॥
आ जरा हर दिल तक लौट चल
साथ दे तो हर मुश्किल हो जाए हल
तेरे संग शायद मैं भी जाउं संभल
मेरी भी कुछ तो तू सुन जा ॥
मैं तेरी खोज में
तू मेरी तलाश में
रह जाए न यूं ही
अधूरी सी आस में
छोड़ भी दे अब आंखों से बुनना
मन से भी कुछ बुन जा॥
12 comments:
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थम जा, जिंदगी..थम जा!!
मुझे मेरे होने का मतलब समझा ॥
देख संग मेरे रातों को जागकर
क्या मिलेगा ख्वाबों के पीछे भागकर
टूट जायेंगें ये,छूट जायेंगें ये
सुबह की हमसफ़र अब बन जा॥
बहुत सुन्दर रचना लगी । बधाई
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।
सुन्दर!
बहुत कठिन बात पूछ रही हैं जिन्दगी से !
घुघूती बासूती
आपने तो अपनी कह दी जिन्दगी से.. अगर जिन्दगी को कुछ कहना हो तो क्या करे...शायद वो आपके साथ साथ ही है :)
हर तरफ़ नूर ही नूर... जलवे ही जल्वे
सिर्फ़ अहसास की जरूरत है..
तुम न मानो मगर हकीकत है ..
तू मेरी तलाश में
रह जाए न यूं ही
अधूरी सी आस में
छोड़ भी दे अब आंखों से बुनना
मन से भी कुछ बुन जा॥
khubsurat lagi ye lines,badhai
काँटों में रह कर गुलाब,
हँसता है-मुस्काता है।
मानव है कितना दुर्बल,
दुःखों से घबराता है।।
ठहरती पल-भर नही है,
बहते दरिया की रवानी।
रात-दिन चलते ही रहना,
जिन्दगी की है निशानी।
Waah ! bahut hi bhaavpoorn sundar geet !
Shabd dil ko chhoo gaye.
Parul,
bahut sundar kavita..achchhee abhivyakti.
lekin itnee udasee..nirasha ..har kavita men..kyon?
Poonam
क्या मिलेगा ख्वाबों के पीछे भागकर
......
zindagi ke dard ko bahut achhe dhang se jana aur likha hai,mann ke bhaw bahut achhe hain
बहुत सुंदर रचना है ... बधाई।
aap sabhi ka hardik aabhar!
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