Friday, June 24, 2011

कर दो..


ख़ामोशी भी दो पल जी ले
बात कोई आहिस्ता कर दो !
कोई रहे न मुझ सा तन्हा
तन्हाई को शीशा कर दो !
दो बातें तेरी और मेरी
शायद कुछ ऐसा बुन जाये
पहन जिसे नया रंग चढ़े फिर
खत्म पुराना किस्सा कर दो !
रात पहेली सी लगती है
आँखों में बरबस जगती है
इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो !
मेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !

45 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

यही आशा सबकी मनों में पिरो दो।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !

बहुत सुन्दर रचना ...

vandana said...

wooww ..bautiful nd .heart touching :)

अनामिका की सदायें ...... said...

pyar ke rishto me tum bhi aao apna aanchal bhar lo..

purane kisso ko bhulo aur nayi koi kahani ghad do...

राकेश कौशिक said...

"ख़ामोशी भी दो पल जी ले
बात कोई आहिस्ता कर दो !
कोई रहे न मुझ सा तन्हा
तन्हाई को शीशा कर दो!"


वाह वाह - वाह वाह - लाजवाब

Er. सत्यम शिवम said...

very nice...touching to my heart

Sonal Rastogi said...

वाह !
तन्हाई को शीशा कर दो
ख़त्म पुराना किस्सा कर दो

क्या बात है ...

shekhar suman said...

बहुत खूब..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

रात पहेली सी लगती है
आँखों में बरबस जगती है
इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो

बहुत अच्छी लगीं आपकी ये पंक्तियाँ
------------------------------------------------
कल 28/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है-
आपके विचारों का स्वागत है .
धन्यवाद
नयी-पुरानी हलचल

इमरान अंसारी said...

बहुत ही खुबसूरत........दिल को छू लेने वाली पोस्ट......खासकर 'मेहंदी के कुछ ज़ख्म.......बहुत खूब.....लाजवाब|

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 28 - 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

साप्ताहिक काव्य मंच-- 52 ..चर्चा मंच

Dr.Nidhi Tandon said...

दिल का एक हिस्सा कोरा कर दो.............सुन्दर अभिव्यक्ति....!!

वाणी गीत said...

जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो ...
यह आशा बनी रहे ...

नीलांश said...

sunder

tanhaai ko sheesha kar do ...nice

इमरान अंसारी said...

बहुत ही खूबसूरत पारुल जी........एक तराशी हुई नज़्म शुरू से आखिर तक उम्दा......वाह....शानदार

अरूण साथी said...

तन्हाई को शीशा कर दो।
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

जीवन की सच्चाई।

जयकृष्ण राय तुषार said...

sundar bahut sundar kavita badhai parul ji

prerna argal said...

मेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !bahut hi badiyaa.gaharai liye hue bahut hi achchi rachanaa.badhaai.



please visit my blog.thanks.

वन्दना said...

बहुत सुन्दर रचना।

सदा said...

तन्हाई को शीशा कर दो
ख़त्म पुराना किस्सा कर दो

वाह ... बहुत ही अच्‍छी शब्‍द रचना ।

Maheshwari kaneri said...

आप के बलांग में पहली बार आई बहुत अच्छा लगा.
.रात पहेली सी लगती है
आँखों में बरबस जगती है
इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो ....
आप की अभिव्यक्ति कुछ अलग सी है ..बहुत अच्छा लगा...
मेरे ब्लांग में भी आप का स्वागत है....

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' said...

‘ख़ामोशी भी दो पल जी लें बात कोई आहिस्ता कर दो!’

बहुत ही सुन्दर रचना...क्या शालीन इल्तिजा

Mridula Harshvardhan said...

very touching

aap bhi aaiye

Naaz

रविकर said...

बहुत सुन्दर रचना ||

kase kahun?by kavita verma said...

menhadi ke kuchh jakham hare hai
fir bhi dono hath bhare hai...bahut sunder...

Sachin Malhotra said...

ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो ! beautiful ..
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

वीना said...

जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो...
बहुत खूब...

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

बहुत ही कोमल भाव संजोये शसक्त रचना
मेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !..
शुभकामनायें.....

Udan Tashtari said...

सुन्दर रचना पारुल!!! वाह!!

M VERMA said...

मेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !

जिन्दगी से रिश्ता तलाशती बहुत खूबसूरत रचना

अशोक सिँह रघुवंशी said...

इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो !
.
.
मन को छू लेने वाली पंक्तियाँ........
आप को बहुत बहुत धन्यवाद....!!!

Ashish said...

waah.. bahut badhiya Parul.. bahut badhiya....

वाणी गीत said...

जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो ...
आशाएं फूलती फलती रहे ...

Mansoor Naqvi said...

bahut sunder.. shabdon ki jaadugari.. :)

जयकृष्ण राय तुषार said...

एक अद्भुत ,लाजवाब कविता /नज्म पारुल जी आपको बहुत बहुत बधाई और ढेरों शुभकामनायें |

Sarika Saxena said...

Hi Parul,

I have passed on an award to you :) Details are here

http://kraftaria.blogspot.com/2011/07/its-award-time.html

love Sarika

Vaneet Nagpal said...

पारुल जी,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम"के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

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kumar said...

bahut khoobsurat likha hai...

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aage bhi aapke sujhavon ka swaagat hai mere blog par...
www.kumarkashish.blogspot.com

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देवेन्द्र पाण्डेय said...

बहुत खूब।

Narendra Patel said...

tanha si jindgi jiye ja rha hoon,
jakhmo ko apne piye ja rha hoon.
vish hai ya amrit malum nahi,
bas nam leke unka jiye ja rah hoo..................................palko pe na aye ye kha tha kisi ne band ankho me ansu liye ja rha hoon...............