Monday, April 25, 2011

कुछ तो ..





कुछ तो कहते
कुछ तो सुनते
कुछ तो होता दिल में!
सोचते न तब
इतना शायद बेवजह
मुश्किल में!
कुछ तो दे जाते
मुझे तुम
नीले-सिले सपने
न यूँ बेमौसम
लगता फिर
दिल में कुछ भी पनपने
मेरा भी तारा चमकता
चाँद की महफ़िल में!
आईने के सामने
फिर मैं खड़ा
जब होता
तुम अगर दिख जाते
मुझको
न रोज तुमको बोता
राह मिल जाती
नज़र आते जो तुम
मंजिल में!
रात के खंजर न चलते
इश्क की सुबकी पर
एक आंसूं भी था समन्दर
आह की डुबकी पर
तेरा ही एक ख्वाब था
शामिल मेरे कातिल में!

49 comments:

Er. सत्यम शिवम said...

namaste parul ji..
बहुत खुबसुरत..दिल के अहसासों को शब्दों में ढ़ाला है...बहुत सुंदर।

संजय भास्कर said...

कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

संजय भास्कर said...

बेहद ख़ूबसूरत और उम्दा

निवेदिता said...

प्रभावी प्रस्तुति.......

दिलीप said...

bahut khoob parul ji...behad khoobsoorat

जयकृष्ण राय तुषार said...

सादगी और संजीदगी से लिखी मन को कुछ सोचने पर कुछ समझने के लिए उकसाती एक भावपूर्ण कविता जो एक विरही नायिका के अंतर्मन को अभिव्यक्त करती है |बधाई और शुभकामनाएं |

chirag said...

hiii
hru?
nice poem
bahut khoob
last lines are really superb

दीपशिखा वर्मा / DEEPSHIKHA VERMA said...

ना रोज तुमको बोता .. वाह!
खूबसूरत रचना.

महफूज़ अली said...

आईने के सामने
फिर मैं खड़ा
जब होता
तुम अगर दिख जाते
मुझको
न रोज तुमको बोता
राह मिल जाती
नज़र आते जो तुम......

बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हैं.... आखिरी पंक्ति ने तो ग़ज़ब ही ढा दिया.... बहुत शानदार कविता..

थैंक्स फॉर शेयरिंग.........

रिगार्ड्स.........

महफूज़ अली said...

आईने के सामने
फिर मैं खड़ा
जब होता
तुम अगर दिख जाते
मुझको
न रोज तुमको बोता
राह मिल जाती
नज़र आते जो तुम......

बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हैं.... आखिरी पंक्ति ने तो ग़ज़ब ही ढा दिया.... बहुत शानदार कविता..

थैंक्स फॉर शेयरिंग.........

रिगार्ड्स.........

अनामिका की सदायें ...... said...

aaj parul ji ki rachna me rhythem ki kuchh kami si hai. sunder bhavabhivyakti.

अक्षय-मन said...

बहुत ही गहराई से पेश किया है आपने इस रचना को अच्छा लगा पढकर
अक्षय-मन "!!कुछ मुक्तक कुछ क्षणिकाएं!!" से

Ashish (Ashu) said...

उफ़ बेहद खूबसूरत रचना..आप कहा ले लाती हॆ इतने सारे रंग.....

Kunal Verma said...

अच्छी कविता

Coral said...

रात के खंजर न चलते
इश्क की सुबकी पर
एक आंसूं भी था समन्दर
आह की डुबकी पर
तेरा ही एक ख्वाब था
शामिल मेरे कातिल में!

बहुत ही सुंदर रचना

विवेक Call me Vish !! said...

antim pagtiya dil ko chho gyi .....wah kya baat hai!

Jai Ho Mangalmay ho

दिगम्बर नासवा said...

तेरा ही एक ख्वाब था
शामिल मेरे कातिल में ...

Gahre ehsas liye ... bahut hi naazuk rachna ... dil ko chooti hai ...

इमरान अंसारी said...

सुभानाल्लाह....बहुत गहरे जज्ब्बातों को समेटे ये पोस्ट शानदार है.....आपके ब्लॉग की हर पोस्ट के साथ आप जो पेंटिंग लगाती हैं वो मुझे बहुत आती हैं......आपकी पसंद की दाद देता हूँ......बहुत खूब|

सुमन'मीत' said...

ahsas se bhari rachna.......

sm said...

beautiful poem

Patali-The-Village said...

बेहद ख़ूबसूरत और उम्दा प्रस्तुति|

Dr.Nidhi Tandon said...

कितनी खूबसूरती से आपने अपनी भावनाओं को शब्दी जामा पहनाया है..........आपको इस सुन्दर रचना हेतु बधाई

Vivek Jain said...

बहुत ही खूबसूरत! एक अनोखा सा आकर्षण है इस कविता में!

विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Ashish said...

hmm..shandaar!

प्रवीण पाण्डेय said...

अहा, पढ़ने में आनन्द आ गया।

एम सिंह said...

दिल की गहराइयों से निकली बात.

दुनाली पर देखें
चलने की ख्वाहिश...

हरकीरत ' हीर' said...

काश कोई कुछ कह गया होता .....

:))

Pradeep said...

संवादहीनता और संशय ...!
बेहतरीन....वाह

Udan Tashtari said...

आह!!


वाह!

बहुत उम्दा!!

अमित श्रीवास्तव said...

गहरे एहसास...

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत दिन बाद आपको पढ़ रहा हूँ पारूल जी..पहले जैसी ही सुंदर शब्द चयन और सुंदर भाव..बधाई

Udan Tashtari said...

किया तो कमेंट था...अब दिखता नहीं...इस सुन्दर रचना पर.

Parul said...

matlab?main samjhi nahi sir

Patali-The-Village said...

बहुत खुबसुरत प्रभावी प्रस्तुति|

JHAROKHA said...

इश्क की सुबकी पर
एक आंसूं भी था समन्दर
आह की डुबकी पर
तेरा ही एक ख्वाब था
शामिल मेरे कातिल में!------------------------वाह पारुल जी,बहुत ही खूबसूरती के साथ आपने मन की भावनाओं को अभिव्यक्ति दी है।

kamal prakash ravi said...

बहुत सुंदर.........

Rakesh Kumar said...

मै तो पहली दफा आपके ब्लॉग पर आया.हैरान कर दिया आपकी सुन्दर प्रस्तुति ने.
'नज़र आते जो तुम
मंजिल में!
रात के खंजर न चलते
इश्क की सुबकी पर'
Wah! excellent rhythm of words with
soft and strong emotions.
मेरे ब्लॉग पर आइयेगा,आपका हार्दिक स्वागत है.

Anonymous said...

vakai "KUCH TO" hai!





vartika!

wordy said...

ishq ki aisi kawayad..kya baat hai!

Anonymous said...

khoobsurat hai!

AMIT said...

sundar panktiyaan..sundar chitr

अमिताभ श्रीवास्तव said...

yah to aap bhi jaanti he ki main aapke andaaz kaa kaayal hoo. hamesha ki tarah prabhaavit...aur aapke shabdo me apana aqs dekhte hue..

anusuya said...

haan..kuch to hai!

anusuya said...

thoda aur rumani bhi ho jaye... :)

ritu said...

hamesha ki tara manbhawan rachna.

Yogesh Amana said...

Bahut hi sundar Abhvyakti... plz visit my blog and give me ur valuable comments = http://yogeshamana.blogspot.com/

M VERMA said...

तेरा ही एक ख्वाब था
शामिल मेरे कातिल में!

बेहतरीन और प्रभावी

tarkvaageesh said...

काफ़ी अच्छा लिखा है

http://navkislaya.blogspot.com/

Kunwar Kusumesh said...

खूब लिखा है लिखती रहना.
उदगारों को कहती रहना.