Monday, October 11, 2010

ख़ामोशी!


तुम न आये मगर
ख़ामोशी आकर चली गयी
लफ्ज़ छिपते फिरे
पर वो सब सुनकर चली गयी !
सुना भी क्या इस दिल ने
एक अदना सा फ़साना
जिसमें सिर्फ तन्हाई थी
मुश्किल था तुम्हे पाना
तेरे इंतज़ार में एक अरसे से
मैं एक रात भी न बुन पाई
और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी !!
मैं जब तलक थी इस सोच में
तुम क्यों नहीं आये ?
उसने अपने किस्से
यूँ कई बार दोहराए
मैं पूछ न सकी कुछ भी
और वो कहती चली गयी
मेरी चुप्पी पे सवाल उठाकर चली गयी !!

55 comments:

वन्दना said...

मुश्किल था तुम्हे पाना
तेरे इंतज़ार में एक अरसे से
मैं एक रात भी न बुन पाई
और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी !!

बेहद सुन्दर भाव और बहुत ही प्रवाहमयी रचना दिल को छू गयी।

Majaal said...

लोगों से सुना है, उनकी वाली करती है,
हमारी ख़ामोशी तो मगर, चुप ही रहती है,
कल हमने जो उसको, पकड़ना चाहा तो,
वो हमें ठेंगा दिखाकर चली गयी ...

खैर और कुछ चले न चले,
आपकी कलम की कलाकारी तो चल - ही गयी ...

लिखते रहिये ...

संतोष कुमार said...

वाह !
बहुत खूबसूरत कविता, बधाई !

विवेक Call me Vish !! said...

कहते है सच्चे दिल से जो चाहो
एक दिन तुम्हारा वो बनके रहेगा
पिघलता है पत्थर भी यारा जहांपे
इश्क तो मोम है, वो पिघलके रहेगा.....

बेहद सुन्दर भाव ......

जयकृष्ण राय तुषार said...

BEBSI KA JIKRA UCHIT HAI LEKIN JEEVAN AUR KAVITA ME AASHAVADI HONA BAHUT JAROORI HAI BADHAI PARULJI NICE POEM

Shekhar Suman said...

बहुत ही खुबसूरत..सुन्दर भाव..
सुन्दर शब्दों का प्रस्तुतीकरण...
मेरे ब्लॉग पर इस बार

एक और आईडिया....

जयकृष्ण राय तुषार said...

kavita behtaren bhav liye hai parul ji bahut bahut badhai

Anonymous said...

..और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी !!
सुन्दर भाव और बहुत ही प्रवाहमयी रचना.
P.S.Bhakuni (Paanu)
Buransh (Ek Prateek)

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

तेरे इंतज़ार में एक अरसे से
मैं एक रात भी न बुन पाई
और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी !!

बेहतरीन पंक्तियाँ !

Apanatva said...

bahut sunder ............
ise kavita ko bunne me kuch jyada hee samay laga diya............

kafee pratikshaa rahee..........

क्षितिजा .... said...

बहुत सुंदर रचना पारुल जी ... बहुत भावपूर्ण

M VERMA said...

सुन्दर रचना ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

विचारो के प्रवाह के गर्भ में से आपने एक बहुत ही सुन्दर रचना को जन्म दिया है!
--
आपकी रचना सोचने को विवश करती है!

A said...

बहुत सुंदर.

For you and a few other Hindi bloggers, I started using Hindi editor. Very good poem

प्रवीण पाण्डेय said...

चुप्पी पर सवाल उठना स्वाभाविक है क्योंकि चुप्पी सबको समझ आती भी नहीं।

Ashish said...

aaha :)

Arshad Ali said...

ये एहसास बड़ी ख़ामोशी से अपनी उपस्थिति बतला जाती है..
जुबान चुप रहे,मन की उलझन शोर मचा जाती है ..
टकटकी लगा के देखते रहे कई दिन उनको
बेरुखी उनकी फिर से अन्दर तक सता जाती है ..

उम्दा पोस्ट पारुल जी.

shikha varshney said...

आखिरी २ पंक्तियाँ बहुत खूबसूरत हैं
बढ़िया रचना.

soni garg said...

waah bahut hi khub really aapki aur ek roshni hai jiski poetry wakayi mujhe pasand hai .........

दीप्ति शर्मा said...

bahut sundar rachna

इमरान अंसारी said...

पारुल जी,

हमेशा की तरह एक बेहतरीन नज़्म ..........सही कहा है कभी-कभी ख़ामोशी ही सब कुछ कह देती है..........बहुत खूब.....वाह...वाह .... दाद कबूल करें...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

उसने अपने किस्से
यूँ कई बार दोहराए
मैं पूछ न सकी कुछ भी
और वो कहती चली गयी
मेरी चुप्पी पे सवाल उठाकर चली गयी

खूबसूरती सी लिखे एहसास ..

monali said...

Lovely lines...very soulful...

Priyanka Soni said...

बहुत ही सुन्दर ! बहुत मोहक !

Priyanka Soni said...

बहुत सुन्दर कविता ! मन प्रसन्न हो गया.

उपेन्द्र " the invincible warrior " said...

bahoot hi khoobsurat kavita

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

hmm bade achhe ehsasat hain ..khaamoshi ka yahi rang .... sab kuch sunna sab kuch kehna mujhe bhi pasand hai

दिगम्बर नासवा said...

तेरे इंतज़ार में एक अरसे से
मैं एक रात भी न बुन पाई
और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी ....

खामोशी का गिला चुप्पी से .... कई खामोशियाँ यूँ ही रोशन कर जाती हैं जीवन को ....
गहरे ज़ज्बात हैं इस नज़्म में ...

Udan Tashtari said...

सुन्दर एवं कोमल भाव...बहुत अच्छी लेखनी...बधाई.

राकेश कौशिक said...

"मेरी चुप्पी पे सवाल उठाकर चली गयी"

विनोद कुमार पांडेय said...

ये रचना भी कमाल की..सुंदर भावपूर्ण ..बधाई

' मिसिर said...

बहुत खूबसूरत..........
रेशमी झीने दुपट्टे -सी
सरसराती हुई आई और चली गयी!

Umra Quaidi said...

लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

http://umraquaidi.blogspot.com/

उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”

wordy said...

itne din ki khamoshi ko nazm mein bhar diya hain..hmm..gud job!

Anonymous said...

powerful silence


vartika

ZEAL said...

.

बेहद सुन्दर भाव !!!

.

JHAROKHA said...

bahut hi samvadna se bhari ekprvah mai rachna jo chupke se aakar kagaz ke panno para apkei kalam dwara sab kuchh kah kar aur dil me bas kar chup cgap chali gai.
bahut hi man ko bhai aapki nazm.
उसने अपने किस्से
यूँ कई बार दोहराए
मैं पूछ न सकी कुछ भी
और वो कहती चली गयी
मेरी चुप्पी पे सवाल उठाकर चली गयी
poonam

love said...

hi ma'am

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thx

love said...

hi ma'am
thx 4 vist my blog and comments

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राजकुमार सोनी said...

सच तो यह है कि चुप्पी और खामोशी की भी अपनी भाषा होती है.... लेकिन पारूल यह भी सच है कि तुम्हारी खामोश रचना बहुत कुछ कह रही है।
बहुत खूब।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

तेरे इंतज़ार में एक अरसे से
मैं एक रात भी न बुन पाई
और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी !! खामोशी कमबख्त कितनी प्यारी होती है जो न चाह कर भी आ जाती है और कोई सवाल उठाकर चली जाती है...।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बेहद सुन्दर भाव....खूबसूरत कविता...

MangoMan said...

khamoshi, chuppi, dard!

bakhoob!

Chinmayee said...

पारुल दी
बहुत सुन्दर रचना ......

KK Yadava said...

बेहद खूबसूरत भाव और जीवन्तता लिए कविता...बधाई.


__________________
'शब्द-सृजन की ओर' पर आज निराला जी की पुण्यतिथि पर स्मरण.

abhi said...

बहुत खूबसूरत कविता लिखी है आपने....

एक जावेद अख्तर का शेर है कुछ इसी तरह, सही से याद अभी नहीं...कभी अपने ब्लॉग पे लगाऊंगा..

हरकीरत ' हीर' said...

पारुल ....
सुकून मिला .....!!

Mansoor Naqvi said...

bahut khoob..marhaba..

Mansoor Naqvi said...

हैवानों की सोहबत में,
मैं भी कुछ ऐसा हो गया,
कुत्ता आया,टुकड़ा खाया,
सीढ़ी पर ही सो गया....

kumar zahid said...

तुम न आये मगर
ख़ामोशी आकर चली गयी
लफ्ज़ छिपते फिरे
पर वो सब सुनकर चली गयी !
तेरे इंतज़ार में एक अरसे से
मैं एक रात भी न बुन पाई
और वो एक पल में
जिंदगी को ख्वाब बनाकर चली गयी !!

पारुल !
बहुत खूब क्या बात है ?
शायद 'बनाकर' की जगह 'बुनकर' कहना चाहती थीं ?

और आपकी तस्वीर पर कुछ अर्ज किया है जो गुमां होता है-


सुन रहा है बहुत ही डूब के वो
या खु़दा उसको मुतमइन रखना....

अक्षय-मन said...

shabd yuin bikher diye...
khamosh panno par...
jane zindagi kuch kehkar chali gai..

bahut accha likhte hain aap..

Coral said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति है ...

मैं पूछ न सकी कुछ भी
और वो कहती चली गयी
मेरी चुप्पी पे सवाल उठाकर चली गयी !!

यही तो विडम्बना रहती है !

ZEAL said...

बेहद सुन्दर और प्रवाहमयी रचना !!!!

Roshni said...

bahut sundar kavita kahi apne....

जयकृष्ण राय तुषार said...

मेरा ताजा गीत आपको समर्पित है।