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ख्वाहिश..!


अपनी ख़ामोशी में भर लूं
तुम्हारी हिचकी
या कि तुम्हारे मन का
हर ज़ख्म चुरा लूं ।
वो जो चुभते हैं
होले-होले
यूँ भी कई रंग घोले
उन आंसूओं को ही
हरदम चुरा लूं ।
कब तक रहूँगा ऐसे
और तुमसे कहूँगा कैसे
क्यों न बिन कहे ही
तुम्हारे उतारे हुए
वो तन्हा से मौसम चुरा लूं ।
मैं पूछता फिरता हूँ
जहाँ भर में
तुम्हारे लफ़्ज़ों का ठिकाना
मौका मिले तो फिर
कोई तुम सी नज़्म चुरा लूं ।
वो अल्हड सी हसरत
जो अक्सर गोल हो जाती है
मिल जाये उसकी मिटटी
तो गीली सी हर कसम चुरा लूं ।
आती नहीं क्यों तुमको
नीली नींद की फिर एक सुबकी
इस फिराक में कि तुम सोओं
और मैं तुम्हारी जिन्द सी कलम चुरा लूं ।

74 comments:

Parul

maine jab bhi gulzaar sahab ko padha hai..man mein aisa hi kuch reha hai..ye nazm unhi ko dedicate karti hoon :)

विनोद कुमार पांडेय

ek sundar abhivyakti...badhiya najm..

wordy

superbbbbbbbb!

महफूज़ अली

आजकल मैं बहुत चूज़ी हो गया हूँ... सच्ची! बहुत ही चूज़ी... अब मुझे हर चीज़ बेस्ट ही चाहिए होती है... और मैं बेस्टेस्ट की ही तलाश करता हूँ... बिलो स्टैण्डर्ड से नफरत सी हो गई है.... इसी तरह मुझे ब्लॉग्गिंग में भी हो गया है... मैं अब बेस्टेस्ट पोस्ट्स ही पढ़ता हूँ... और उन पर कमेन्ट करता हूँ.... और रिदम ऑफ़ वर्ड्स उनमें से एक बेस्टेस्ट ब्लॉग है... और इसको बेस्टेस्ट बनाने वाला तो जेम (GEM) है .....कविता या लेखनी वही होनी चाहिए जो आपके दिल में उतर जाये... यू आर ग्रेट... विद इन्नेट फ्लो ऑफ़ वर्ड्स ... बेगेटिंग... फ्रॉम दा कोर ऑफ़ हार्ट....


रिगार्ड्स...

Sonal Rastogi

wow parul behad khoobsurat
दिल छूने वाली नज़्म लिखी है ,क्यों ना इसकी छुअन चुरा लूं
:-)

A

Parul,

Nice one :) But I am not clear on one part:-

You wrote it as dedication to Guljarji - correct?

For a moment, I though Guljarji wrote....

अनिल कान्त :

wow !

क्षितिजा ....

shaandaar aur jaandaan.....

Majaal

हमे भी आपका लिखा पढ़ कर वादी-ए-गुलज़ार का अहसास होता है, इसी तरह अरमानों के खज़ाने से सोच चुराते रहिये ... वो गाना है न .. चोरी में भी है मज़ा ... !

संगीता स्वरुप ( गीत )

आती नहीं क्यों तुमको
नीली नींद की फिर एक सुबकी
इस फिराक में कि तुम सोओं
और मैं तुम्हारी जिन्द सी कलम चुरा लूं

बहुत सुन्दर ...कोमल से एहसास

इमरान अंसारी

पारुल जी,

हमेशा की तरह एक बार फिर एक खुसुरत नज़्म.........आपने ये गुलज़ार साहब को समर्पित की ....बहुत अच्छा लगा .........गुलज़ार साहब इस दौर के एक बेहतरीन शायर हैं |

आपको पड़कर ऐसा लगता है जैसे आप लफ्जों की नाव में बिठाकर कही दूर ख्वाबो में ले जाती हैं|

ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आयीं-
"कब तक रहूँगा ऐसे
और तुमसे कहूँगा कैसे
क्यों न बिन कहे ही
तुम्हारे उतारे हुए
वो तन्हा से मौसम चुरा लूं ।
मैं पूछता फिरता हूँ
जहाँ भर में
तुम्हारे लफ़्ज़ों का ठिकाना
मौका मिले तो फिर
कोई तुम सी नज़्म चुरा लूं ।"

mukti

बहुत खूबसूरत नज़्म है. अपने बज़ पर इसे शेयर कर दूँ?

कुश

बहुत अच्छा लिखा.. बिलकुल गुलज़ार साहब के तेरे उतारे हुए दिन की तरह..

विवेक Call me Vish !!

bharat ke bahut bade fankar hai gulzar sahab....achha laga aapka unke liye samman!!! kosshish rahegi m bhi kuch achha likh saku.. !!



जय हो मंगलमय हो

Parul

jarur mukti... :)

zindagi-uniquewoman.blogspot.com

bahut khoob likha hai aapne...parul ji...n thanks for ur comment also..

माधव

sundar

Anonymous

ultimate





vartika!

anusuya

main bhi kya na chura loon tumhara :)

राजकुमार सोनी

हां तो पारूल ने एक बार साबित कर दिया कि वह सबकी चहेती क्यों है.
पारूल को सब इसलिए भी पसन्द करते हैं क्योंकि पारूल सबसे जुदा लिखती है.
पारूल तुम्हारी पहली किताब जब भी आएं मुझे जरूर बताना.... लाइन लगाकर आटोग्राफ लेने वालों में सबसे पहली पंक्ति में मैं ही खड़ा रहूंगा.
वेलडन

अजय कुमार

बहुत खूबसूरत रचना ।

Pawan Rana

very very nice

Manoj K

I DONT READ A LOT OF POETRY AND ASSOCIATED KIND OF THINGS, BUT THIS TIME ITS SO SIMPLE AND THE FLOW IS SO NATURAL, I COMPLETED IT.. A VERY DEEP & EMOTIONAL WRITING.

BEST
MANOJ KHATRI

Avinash Chandra

behad khubsurat, har pankti...

Apanatva

Gulzaar ji agar ye nazm padenge to naa jane kitnee nazme tumharee ise nazm par nyochawar ho saktee hai.......
Ye atishayokti nahee hai......

राजेश उत्‍साही

सच्‍ची अद्भुत ख्‍वाहिश और नज्‍म भी।

इमरान अंसारी

पारुल जी,

क्यों मजाक करती हैं......उर्दू के मामले में हम आपके सामने कहा ठहरते हैं .......काश मैं भी आपकी जैसी नज्मे लिख पाता|

सत्यप्रकाश पाण्डेय

बहुत सुन्दर।

वन्दना

वाह क्या ख्वाहिश है………………बहुत ही खूब्।

दिगम्बर नासवा

आती नहीं क्यों तुमको
नीली नींद की फिर एक सुबकी
इस फिराक में कि तुम सोओं
और मैं तुम्हारी जिन्द सी कलम चुरा लूं ...

कुछ अन्छुवे बिंब और अंजानी चाहत और नाज़ुक भावनाएँ सॅंजो कर लिखा है इस रचना को .... प्यार का एहसास होता ही ऐसा है ... कुछ भी करने को मन करता है ... बहुत खूबसूरत नज़्म ...

स्वप्निल कुमार 'आतिश'

bahut badhiya hai parul ji .... gulzar saab to bas ... aap ki khwahishen jaldi poori honi chahiye ...

Gaurav Singh

क्या कहूँ आपको और क्या कहूँ आपकी तारीफ में, शब्द हिचकिचा रहे हैं,
हर एक शब्द दिल तक उतार गया.

Gaurav Singh
This comment has been removed by the author.
Gaurav Singh
This comment has been removed by the author.
Coral

बहुत ही खूबसूरत ......

JHAROKHA

एक बेहतरीन रचना----हृदयस्पर्शी।

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar

बेहतरीन--।

crazy devil

bahut khoobsoorat..

सुधीर

bahut sunder

विरेन्द्र सिंह चौहान

Well ..Parul ji....Great work again. Great NAZM....and it's really fantastic to go through your blog because every piece of writing is just too good to miss.

Congratulations...... Parul ji...

संजय कुमार चौरसिया

bahut sundar paarulji

डॉ. हरदीप संधु

दिल को छू गई....
वाह ! वाह!

Sonal

bahut hi badiya....

VIJAY KUMAR VERMA

बहुत ही सुन्दर शब्द चयन ..अच्छी प्रस्तुति

जयकृष्ण राय तुषार

behtareen rachana aapko apni rachnayen print media me bhi dena chahiye

MangoMan

rad! what an expression! loved it!

neeli neend ki subki! I'm dumbfounded!

misir

कमाल का तसव्वुर ,अद्भुत प्रस्तुतीकरण ,
बहुत बहुत मुबारक !

पंकज मिश्रा

बहुत सुन्दर नज़्म लिखी है पारुल जी|

boletobindas

गजब पारुल जी गजब.....शब्दों का मेल। जल्दी ही गुलजार तक पहुंचने वाली है।

ALOK KHARE

very touchy, sundar

Dr.R.Ramkumar

अपनी ख़ामोशी में भर लूं
तुम्हारी हिचकी

तुम्हारे मन का
हर ज़ख्म चुरा लूं ।
वो जो चुभते हैं
होले-होले

तुम्हारे उतारे हुए
वो तन्हा से मौसम चुरा लूं ।

आती नहीं क्यों तुमको
नीली नींद की फिर एक सुबकी
इस फिराक में कि तुम सोओं
और मैं तुम्हारी जिन्द सी कलम चुरा लूं ।

behad asardar khwab bune hain aapne..har harf par bosa karne ka jee chata ha..

aapki teep par apna khyal apne blog mein diya hai..ek bar phir qadam rakhein--

हरकीरत ' हीर'

पारुल आज दिल खुश हो गया ...
बहुत ही खूबसूरत नज़्म उतरी है ......!!

Shekhar Suman

is post par apna comment na dekhkar aashcharya hua.....
bahut hi behtareen rachna...
sabe aakhiri pankti sabse shaandaar..
================================
मेरे ब्लॉग पर इस बार थोडा सा बरगद..
इसकी छाँव में आप भी पधारें....

सुमन'मीत'

बहुत सुन्दर..............

Mumukshh Ki Rachanain

यहाँ तो कोई हेराफेरी नहीं, पूरी की पूरी सीनाजोरी है,,,,,,,,,,,,
चोरी की इससे बढ़िया इच्छा एवं स्वीकारोक्ति और क्या होगी........................
माननीय गुलज़ार जी को समर्पित यह रचना दिल को छू गयी..........

गर्दिक शुभकामनाएं..........

चन्द्र मोहन गुप्त

Mumukshh Ki Rachanain

यहाँ तो कोई हेराफेरी नहीं, पूरी की पूरी सीनाजोरी है,,,,,,,,,,,,
चोरी की इससे बढ़िया इच्छा एवं स्वीकारोक्ति और क्या होगी........................
माननीय गुलज़ार जी को समर्पित यह रचना दिल को छू गयी..........

गर्दिक शुभकामनाएं..........

चन्द्र मोहन गुप्त

अनामिका की सदायें ......

हमेशा की तरह एक निर्मल और सुंदर अभिव्यक्ति.

kumar zahid

क्यों न बिन कहे ही
तुम्हारे उतारे हुए
वो तन्हा से मौसम चुरा लूं ।
मैं पूछता फिरता हूँ
जहाँ भर में
तुम्हारे लफ़्ज़ों का ठिकाना
मौका मिले तो फिर
कोई तुम सी नज़्म चुरा लूं ।

parul g!!
nowords to utter.
very nicely nitted dreams in poetry.
congra. billions..

neha

very nice poem........keep it up

Shekhar Suman

मेरे ब्लॉग पर इस बार ....
क्या बांटना चाहेंगे हमसे आपकी रचनायें...
अपनी टिप्पणी ज़रूर दें...
http://i555.blogspot.com/2010/10/blog-post_04.html

Tripat "Prerna"

behad sunder :)

http://liberalflorence.blogspot.com/

psingh

rachna khubsurat hai
badhai

Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

बहुत सुन्दर रचना ... कहीं दिल में एक ठंडी आह सी भर जाति है ...

Priyanka Soni

बहुत सुन्दर !

योगेन्द्र मौदगिल

gulzar saab ka koi jawab nahi.....achhi prastuti....sadhuwad...

Prem

बहुत सुंदर रचना शुभकामनायें a

Prem

very nice expressions,thanks for coming to my blog.

Anupam karn

बहुत बढ़िया !
इतना की आपके ब्लॉग को मैंने खुद के ब्लॉग से जोर दिया है .

P S Bhakuni (Paanu)

......aaj ek baar fir aapke blog pe aana huwa,achcha huwa vrna ek khubsurat najm se vanchit ho raha tha,
बहुत खूबसूरत रचना ।

anjana

बहुत सुन्दर .........


नवरात्रि की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।जय माता दी ।

P S Bhakuni (Paanu)

आपको और आपके परिवार को नवरात्र की हार्दिक शुभ कामनाएं ,

Mrs. Asha Joglekar

Bahut sunder . Guljar sahab ka touchhai isme.
अपनी ख़ामोशी में भर लूं
तुम्हारी हिचकी
या कि तुम्हारे मन का
हर ज़ख्म चुरा लूं ।
वो जो चुभते हैं
होले-होले
यूँ भी कई रंग घोले
उन आंसूओं को ही
हरदम चुरा लूं ।

Priyanka Soni

नि:शब्द !
अभिभूत हो उठी.

दिपाली "आब"

pyaari nazm kahi hai paarul..baar baar padhne ko jee karta hai, nice metaphors.. :)