Wednesday, March 26, 2014

बिगड़ जाएँ....






यही है चाह
ख़ामोशी टेढ़ा मुंह कर ले
और बातें बिगड़ जाएँ !!
ख्वाब इतने हो बेशक्ल
कि रातें बिगड़ जाएँ !!
दिल पत्थर हो जाएँ
और आईने टूटे
हो अपने ही गुनहगार
खुद को इतना लूटे
चोट ऐसी हो इश्क़ की
कि बरसातें बिगड़ जाएँ !!
चाँद सिले कतरों से 
और यूँ ही फट जाये
और एक तू भी
इधर-उधर कहीं से कट जाये
तन्हाई के कुछ पैबंद
टांक दूं लम्हों पर इस तरह
हिसाब में इश्क़ के
ज़िन्दगी के खाते बिगड़ जाएँ !!


21 comments:

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

Beahad Khubsurat abhivyakri....Parul ji....

Mithilesh dubey said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (27-03-2014) को लोकतंत्र का महापर्व आया है ( चर्चा - 1564 ) "अद्यतन लिंक" पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Rahul... said...

और एक तू भी
इधर-उधर कहीं से कट जाये
-------------------------------------
ह्रदय कि व्यथा कथा कुछ ऐसी कि … कोई वेदना , तड़प जिंदगी से जुदा हो नहीं पाती। …

Digamber Naswa said...

अनोखे और नए बिम्ब जोड़ कर अपना आक्रोश रचा है इस रचना में ... बहुत खूब ...

प्रवीण पाण्डेय said...

गहरे भाव, सुन्दर रचना।

Gudden-Online Shopping India said...

Nice Post.......Thanks

Parul kanani said...

Shukriya

संजय भास्‍कर said...

बहुत महीन सी भावों को समेटा ह आपने इस रचना में , पढ कर अच्छा लगा..

संजय भास्कर
शब्दों की मुस्कराहट
http://sanjaybhaskar.blogspot.in

Anonymous said...

Beautiful!

हिमकर श्याम said...

बेहद उम्दा...अजीब-सी अकुलाहट, विषाद और आक्रोश है.. शब्दों का प्रयोग बखूबी किया गया है...

सारिका मुकेश said...

bahut khubsurti se buna hai aapne bhavon ko;))
shubhkamnayen:))

Onkar said...

सुन्दर प्रस्तुति

इमरान अंसारी said...

आपको पढना हमेशा बहुत अच्छा लगता है | लफ्ज़ तो जैसे खेलते हैं आपकी कलम के साथ |

कविता रावत said...

बहुत बढ़िया भावाभिव्यक्ति

Rahul said...

very nice....keep writing...

निवेदिता श्रीवास्तव said...

एक गीत के बोल खोजते हुए नेट पर घूम रही थी ,तभी आपकी एक पोस्ट आपकी बिटिया के जन्म की मिली :) .... बस वहीं सी आपकी रचनाएं पढ़ते - पढ़ते यहाँ तक आ गयी ... बहुत अच्छा लगा आपके विचार पढ़ना ......

निवेदिता श्रीवास्तव said...

एक गीत के बोल खोजते हुए नेट पर घूम रही थी ,तभी आपकी एक पोस्ट आपकी बिटिया के जन्म की मिली :) .... बस वहीं सी आपकी रचनाएं पढ़ते - पढ़ते यहाँ तक आ गयी ... बहुत अच्छा लगा आपके विचार पढ़ना ......

Rahul Kumar said...

very nice...

some time love does that..

visit me to read :गुज़ारिश ...on

http://rahulpoems.blogspot.in/2014/06/blog-post.html

पूनम श्रीवास्तव said...

baat kya hai bhai.man me itni saari bhavnaayen jo chhupa kar kahaan rakhi thi. kitne gubaar bharen hain dil men.bhavnaao ki abhivyakti bahut shadaar dhang se ki hai.bahut bahut badhai---poonam

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

शब्द संयोजन बहुत सुन्दर लेकिन कुछ ऐसी व्यथा जिसने आक्रोश का रूप धर लिया ।