Monday, February 1, 2010

विजेता !


थोडा सा तू यकीं रख
थोडा सा एतबार कर
तुझे जिंदगी से हो न हो
मगर तू खुद से प्यार कर ॥
वक़्त ने चाहे कितने भी हो
अँधेरे किये
उम्मीद दिल में जलाये है
रोशनी के कई दीये
रातों का न तू खौफ रख
सुबह का इंतज़ार कर ॥
मुश्किलें भी है जरुर
माना कुछ भी आसां नहीं
कोशिश तो करके देख
होगा तेरे पास क्या नहीं
कुछ कर गुजरने से पहले
यूँ ही न अपनी हार कर ॥
खुद को जीत जाना ही
जिंदगी की जीत है
गर तुझको खुद से प्रेम है
तो जिंदगी से भी प्रीत है
इस प्रीत के संबल से तू
औरों के भी दिल गुलज़ार कर ॥
एक राह कहीं रुक गयी
तो मंजिलें खत्म नहीं
गर होंसला है दिल में तो
मेहनत कभी बेदम नहीं
अपने इसी जुनूं से तू
नया रास्ता इख्तियार कर ॥
तुझे जिंदगी से हो न हो
मगर तू खुद से प्यार कर ................................. ॥

16 comments:

Ashish said...

एक राह कहीं रुक गयी
तो मंजिलें खत्म नहीं
गर होंसला है दिल में तो
मेहनत कभी बेदम नहीं..

Bahut khoob... badhiyaaaa...

निर्मला कपिला said...

माना कुछ भी आसां नहीं
कोशिश तो करके देख
होगा तेरे पास क्या नहीं
कुछ कर गुजरने से पहले
यूँ ही न अपनी हार कर
वाह पारुल बहुत सुन्दर सकारात्मक सन्देश देती कविता के लिये बधाई

Apanatva said...

bahut sunder kavita.positivity liye.....

Apanatva said...

bahut sunder kavita.positivity liye.....

आवेश said...

sundar kavita

Parul said...

dhanywaad!!

दीपक 'मशाल' said...

hausla badhati kavita..
Jai Hind...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर है आपकी यह रचना!
आप यहाँ भी हैं-
http://charchamanch.blogspot.com/2010/02/blog-post_02.html

Avinash Chandra said...

Sundar kavita...
Badhayee sweekarein

Parul said...

shukriya!

Parul said...
This comment has been removed by the author.
wordy said...

har intazaar sir-aankhon par!

संजय भास्कर said...

पारुल बहुत सुन्दर प्रभाव शाली ढंग से मन की संवेदनाओ को म्लिखा है शुभकामनायें

vivek said...

is kavitaa ko light music yaa western main compose karne ka bahut man hai...bahut achha parul ji abhut achha

दीनदयाल शर्मा said...

Apki kavitayen acchi lgi. badhaee.

Rajendra kaumar said...

Apki sabhi kavitayen acchi lgi. badhaee swikaren.