Tuesday, January 16, 2018

तेरा भी है, मेरा भी।।


                     




गम का खजाना तेरा भी है, मेरा भी
ये नजराना तेरा भी है, मेरा भी।
कुछ मौसम उलझे है ऐसे आंखों में
ख्वाबों का बरबस चुभ जाना तेरा भी है, मेरा भी।।
यूं मंजर कतरा कतरा हो जाते हैं
डूबा सा कोई मुहाना तेरा भी है, मेरा भी।।
बातें कईं अब बंद पडी है दिल के खत में
ढूंढे कोई वो एक ठिकाना जो तेरा भी हो, मेरा भी।।
दिल जाने सब कुछ फिर भी ना कह पाए
चुप सा फसाना तेरा भी है, मेरा भी।।
दर्द हमारी खामोशी का कोई क्या जाने
जख्म पुराना तेरा भी है, मेरा भी।।
प्यार हमारा एक हमें यूं कर जाए
दिल दीवाना तेरा भी है, मेरा भी।।

7 comments:

दिगंबर नासवा said...

बहुत ख़ूब ...
प्रेम भी एक फसाना भी एक ... ग़म भी एक ख़्वाब भी एक तो प्रेम तो एक होना ही है ... बहुत लाजवाब ...

VIVEK VK JAIN said...

kam likh rhe h. lekin jab padhta hu acha lgta hai. likhte rahiye...

Onkar said...

बहुत सुन्दर

Onkar said...

बहुत सुन्दर

संदीप said...

मेरा नाम संदीप है
और मैं आप लोगों की वेबसाइट को हमेशा फॉलो करता हूं
मुझे उम्मीद है कि आप आगे भी अच्छी-अच्छी चीजें लाते रहेंगे

Akshit Sharma said...

aap bhut achi post likhte ho me apki Website ko bhut time se follow krta hun

Akshit Sharma said...

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