Monday, October 3, 2016

यूँ तो!






यूँ तो पल नहीं लगता है
दिल के रोने में
मगर सदियाँ गुजर जाती है
खुद के खाली होने में !!
यही सोचता हूँ आखिर
खुद को कहाँ रख दूं
कि रह जाओ बस तुम ही
इस दिल के कोने में !!
हसरतों की दौड़ में
मुमकिन नहीं
तुम तक पहुंचू
हौसला चाहिए फिर भी
खुद को तन्हा बोने में !!
दर्द का दरीचा
जब जब भी भर आया
रहा है कोई तो खलल
आह भिगोने में !!
कसक इतनी रही
मैं खुद को भी न मिला
रहा है हाथ तुम्हारा भी
मेरे खोने में !!


16 comments:

wordy said...


ultimate!!

wordy said...


'yun to' ishq ka dastoor hai

anusuya das said...


parul,tum to kamaal ho
lafzon se khel jati ho..kaise?

अजय कुमार झा said...

वाह जी ,बहुत अच्छे , सरलता सहजता से सब कुछ कह कर प्रभावित करना कोइ आपसे सीखे , बहुत उम्दा ...



यूं ही ,
रच देती हो ,
शब्दों , भावों का ,
इक अद्भुत संसार ,
कितनी सहज ,
सरल ,
प्रभावी हो ,
माहिर हो ,
आखर मोती पिरोने में ....

anusuya das said...


fst time i have come on your blog
sach mano..hil gayi :)

Anonymous said...

Beautiful composition as usal


Aniket

राकेश कौशिक said...

वाह वाह

Anonymous said...


immense writing!







vartika

anilsahay said...


touchy!

Anonymous said...


behad umda




ashok parikh

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खुद को बोने और खोने का सिलसिला भी कितना अजीब होता है ... बहुत सुन्दर .

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Digamber Naswa said...

बहुत खूब ... सच है की उम्र लग जाती है गम भुलाने में ... शब्दों का ताना बना मन तक जाता है ...

savan kumar said...

Bahut sundar

Rajesh kumar Rai said...

वाह ! बहुत सुंदर प्रस्तुति। बहुत खूब।

Kaushal Lal said...

बहुत सुन्दर ......