Thursday, April 2, 2009

ख्वाहिश!


न जाने कब से सोचता हूँ मैं
काश जिंदगी कुछ अलग होती
मैं कुछ सीखता हरेक पल से
ये वक्त का नया सबब होती ॥
मैं न शायद इतना तन्हा होता
साथ होती तुम,जहाँ होता
कुछ तो मायने बदलते अपने
न बातें ख़ुद के लिए बेमतलब होती ॥
मैं अपनी ही सोच से उबरता
और तुझ जिंदगी से भरता
अपने लिए न सही,तेरे लिए कुछ करता
काश तुम ही मेरे लिए सब होती॥
रहता एहसास कोई अपना तो है
ख़ुद के लिए न सही,तेरे लिए कोई सपना तो है
जो न देख पाता ख़ुद से मैं
ऐसी कोई ख्वाहिश तुम से जगमग होती ॥
बात सुनता हूँ ये मैं बरसों से
तुझे जीया नही किसी ने अरसों से
ऐसा हो पाता, तो क्या हो तुम मैं बतलाता
न खामोशी से मेरी दुनिया लबालब होती॥
पाता हूँ तुम्हे जब लफ्जों से परे
सोचता हूँ यही,दिल क्या करे ?
जिसके लिए लम्हे,तुम्हारी कल्पना से है भरे
उसका तो बस तुम ही रब होती॥

11 comments:

अनिल कान्त : said...

बेहद खूबसूरत भाव ...और दिल के भावों को आपने बहुत ही खूबसूरत तरीके से उतरा है यहाँ

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

neeshoo said...

पारूल जी आप की कलम से निकली सभी रचनाएं लाजवाब होती हैं । यह भी उनमें से एक है । बहुत सुन्दर

विवक कुमार said...

खबरें प्रकाशित करने से रोकने का आदेश देने से कोर्ट का इनकार

एचटी मीडिया बनाम भड़ास4मीडिया : सुनवाई की अगली तारीख 24 जुलाई

शैलबाला-प्रमोद जोशी प्रकरण से संबंधित खबरें भारत के नंबर वन मीडिया न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया पर पब्लिश किए जाने के खिलाफ एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर केस की पहली सुनवाई आज हुई। वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से दायर केस में भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह और तीन अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। हाईकोर्ट में दर्ज इस केस संख्या सीएस (ओएस) 332/2009 की सुनवाई हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 24 में विद्वान न्यायाधीश अनिल कुमार ने की।

इस दौरान एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से हाजिर हुए वकील ने केस निपटारे तक भड़ास4मीडिया पर एचटी मीडिया और इससे जुड़े लोगों से संबंधित खबरें प्रकाशित न करने देने का आदेश पारित करने का अनुरोध कोर्ट से किया। इस बाबत एचटी मीडिया और अन्य की तरफ से कोर्ट में अर्जी भी दी गई थी। कोर्ट ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। प्रतिवादियों की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील निलॉय दासगुप्ता ने कोर्ट को जानकारी दी कि कुछ प्रतिवादियों ने नोटिस 29 मार्च को रिसीव किया है और एक प्रतिवादी के पास अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस समेत सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के आदेश दिए। प्रतिवादियों को अगले चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 जुलाई तय की गई है। प्रतिवादियों के वकील निलॉय दासगुप्ता ने बाद में बताया कि एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से जो केस दायर किया गया है, उससे संबंधित जो नोटिस प्रतिवादियों के पास भेजा गया है, उसमें कई चीजें मिसिंग हैं। उदाहरण के तौर पर नोटिस के पेज नंबर 117 पर जिस कांपैक्ट डिस्क के होने का उल्लेख किया गया है, वो नदारद है। साथ ही सभी प्रतिवादियों को अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। ऐसे में कोर्ट ने वादियों के वकील को सभी दस्तावेज व कागजात प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वेबसाइट पर वादियों से संबंधित कंटेंट पब्लिश न करने को लेकर जो अनुरोध कोर्ट से किया गया, उसे नामंजूर कर दिया गया।

अल्पना वर्मा said...

खूबसूरत भाव - सुन्दर रचना.

mehek said...

बात सुनता हूँ ये मैं बरसों से
तुझे जीया नही किसी ने अरसों से
ऐसा हो पाता, तो क्या हो तुम मैं बतलाता
न खामोशी से मेरी दुनिया लबालब होती॥
waah sunder hamesha ki tarah bhav sampurn.

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर भाव से युक्‍त अच्‍छी रचना ... बधाई।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"सोचता हूँ यही,दिल क्या करे ?
जिसके लिए लम्हे,तुम्हारी कल्पना से है भरे
उसका तो बस तुम ही रब होती॥"
पारुल जी!
सशक्त शब्दों में गुंथी हुई आपकी रचना अच्छी लगी।
लिखना जारी रक्खें।
बधाई।

विनय said...

आपकी रचनाएँ पढ़ता हूँ जब भी, पल जैसे पिछली गलियों से मुझे बुलाने लगते हैं!

Sandeep Dubey said...

Nice Lines…I am also writing some such kind of poem ,
Plz see once it on – http://sandeepdubeyfaizabad.blogspot.in/

Sandeep Dubey said...

Nice Lines…I am also writing some such kind of poem ,
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