ख़ामोशी भी दो पल जी ले
बात कोई आहिस्ता कर दो !
कोई रहे न मुझ सा तन्हा
तन्हाई को शीशा कर दो !
दो बातें तेरी और मेरी
शायद कुछ ऐसा बुन जाये
पहन जिसे नया रंग चढ़े फिर
खत्म पुराना किस्सा कर दो !
रात पहेली सी लगती है
आँखों में बरबस जगती है
इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो !
मेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !
यही आशा सबकी मनों में पिरो दो।
ReplyDeleteमेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
ReplyDeleteफिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !
बहुत सुन्दर रचना ...
wooww ..bautiful nd .heart touching :)
ReplyDeletepyar ke rishto me tum bhi aao apna aanchal bhar lo..
ReplyDeletepurane kisso ko bhulo aur nayi koi kahani ghad do...
"ख़ामोशी भी दो पल जी ले
ReplyDeleteबात कोई आहिस्ता कर दो !
कोई रहे न मुझ सा तन्हा
तन्हाई को शीशा कर दो!"
वाह वाह - वाह वाह - लाजवाब
very nice...touching to my heart
ReplyDeleteवाह !
ReplyDeleteतन्हाई को शीशा कर दो
ख़त्म पुराना किस्सा कर दो
क्या बात है ...
बहुत खूब..
ReplyDeleteरात पहेली सी लगती है
ReplyDeleteआँखों में बरबस जगती है
इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो
बहुत अच्छी लगीं आपकी ये पंक्तियाँ
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कल 28/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है-
आपके विचारों का स्वागत है .
धन्यवाद
नयी-पुरानी हलचल
बहुत ही खुबसूरत........दिल को छू लेने वाली पोस्ट......खासकर 'मेहंदी के कुछ ज़ख्म.......बहुत खूब.....लाजवाब|
ReplyDeleteदिल का एक हिस्सा कोरा कर दो.............सुन्दर अभिव्यक्ति....!!
ReplyDeleteजिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो ...
ReplyDeleteयह आशा बनी रहे ...
sunder
ReplyDeletetanhaai ko sheesha kar do ...nice
बहुत ही खूबसूरत पारुल जी........एक तराशी हुई नज़्म शुरू से आखिर तक उम्दा......वाह....शानदार
ReplyDeleteतन्हाई को शीशा कर दो।
ReplyDeleteबहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
जीवन की सच्चाई।
sundar bahut sundar kavita badhai parul ji
ReplyDeleteमेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
ReplyDeleteफिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !bahut hi badiyaa.gaharai liye hue bahut hi achchi rachanaa.badhaai.
please visit my blog.thanks.
बहुत सुन्दर रचना।
ReplyDeleteतन्हाई को शीशा कर दो
ReplyDeleteख़त्म पुराना किस्सा कर दो
वाह ... बहुत ही अच्छी शब्द रचना ।
आप के बलांग में पहली बार आई बहुत अच्छा लगा.
ReplyDelete.रात पहेली सी लगती है
आँखों में बरबस जगती है
इस से पहले चाँद छिपे फिर
दिल का एक कोरा हिस्सा कर दो ....
आप की अभिव्यक्ति कुछ अलग सी है ..बहुत अच्छा लगा...
मेरे ब्लांग में भी आप का स्वागत है....
‘ख़ामोशी भी दो पल जी लें बात कोई आहिस्ता कर दो!’
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर रचना...क्या शालीन इल्तिजा
very touching
ReplyDeleteaap bhi aaiye
Naaz
बहुत सुन्दर रचना ||
ReplyDeletemenhadi ke kuchh jakham hare hai
ReplyDeletefir bhi dono hath bhare hai...bahut sunder...
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो...
ReplyDeleteबहुत खूब...
बहुत ही कोमल भाव संजोये शसक्त रचना
ReplyDeleteमेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
फिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !..
शुभकामनायें.....
सुन्दर रचना पारुल!!! वाह!!
ReplyDeleteमेहंदी के कुछ ज़ख्म हरे हैं
ReplyDeleteफिर भी दोनों हाथ भरे हैं
ऐसे भी एक उम्र कटे तो
जिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो !
जिन्दगी से रिश्ता तलाशती बहुत खूबसूरत रचना
इस से पहले चाँद छिपे फिर
ReplyDeleteदिल का एक कोरा हिस्सा कर दो !
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मन को छू लेने वाली पंक्तियाँ........
आप को बहुत बहुत धन्यवाद....!!!
waah.. bahut badhiya Parul.. bahut badhiya....
ReplyDeleteजिंदगी से मेरा रिश्ता कर दो ...
ReplyDeleteआशाएं फूलती फलती रहे ...
bahut sunder.. shabdon ki jaadugari.. :)
ReplyDeleteएक अद्भुत ,लाजवाब कविता /नज्म पारुल जी आपको बहुत बहुत बधाई और ढेरों शुभकामनायें |
ReplyDeleteHi Parul,
ReplyDeleteI have passed on an award to you :) Details are here
http://kraftaria.blogspot.com/2011/07/its-award-time.html
love Sarika
पारुल जी,
ReplyDeleteनमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम"के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|
Everything is very open and very clear explanation of topic. It contains truly information
ReplyDeleteIT's great stuff. I enjoyed to read this blog.
ReplyDeleteIt's great stuff. it's heart touching lines.
ReplyDeletebahut khoobsurat likha hai...
ReplyDeleteaage bhi aapke sujhavon ka swaagat hai mere blog par...
ReplyDeletewww.kumarkashish.blogspot.com
aage bhi aapke sujhavon ka swaagat hai mere blog par...
ReplyDeletewww.kumarkashish.blogspot.com
बहुत खूब।
ReplyDeletetanha si jindgi jiye ja rha hoon,
ReplyDeletejakhmo ko apne piye ja rha hoon.
vish hai ya amrit malum nahi,
bas nam leke unka jiye ja rah hoo..................................palko pe na aye ye kha tha kisi ne band ankho me ansu liye ja rha hoon...............